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  खान सर की सफलता की कहानी : ₹400 के कमरे से करोड़ों दिलों तक का सफर! जानिए Khan Sir Patna की अनसुनी कहानी ​ परिचय या जानकारी जब भी देश के सबसे लोकप्रिय, अनोखे और पसंदीदा शिक्षकों की बात होती है, तो 'खान सर' (Khan Sir) का नाम सबसे ऊपर आता है। अपनी ठेठ बिहारी बोली, गजब के सेंस ऑफ ह्यूमर और सबसे कठिन-से-कठिन टॉपिक को चुटकियों में समझा देने वाले अंदाज़ के कारण वे आज देश के कोने-कोने में मशहूर हैं। ​यूट्यूब पर करोड़ों सब्सक्राइबर्स और क्लासरूम में हजारों छात्रों के बीच छाए रहने वाले खान सर का असली नाम क्या है? उन्होंने अपना सफर कैसे शुरू किया और कैसे वे देश के सबसे सस्ते और बेहतरीन कोचिंग देने वाले शिक्षक बने? आइए जानते हैं खान सर की पूरी कहानी। ​1. शुरुआती जीवन और संघर्ष (Early Life & Background) ​खान सर का जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। ​पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता सेना में थे और भाई भी भारतीय सेना में कार्यरत हैं। देश सेवा का यह जज्बा खान सर में भी बचपन से था। ​सेना में जाने का सपना: खान सर भी एनडीए (NDA) के ज़रिए सेना में शामिल हो...
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आचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी आलोचना के शिखर पुरुष ​आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य को वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान की। उन्होंने साहित्य के इतिहास को केवल कालक्रम के रूप में न देखकर, उसे जन-मानस की भावनाओं के विकास के रूप में परिभाषित किया। ​ १. परिचय एवं व्यक्तित्व ​ जन्म: ४ अक्टूबर, १८८४ (अगौना, बस्ती, उत्तर प्रदेश)। ​ देहांत: २ फरवरी, १९४१। ​ व्यक्तित्व: शुक्ल जी गंभीर, मननशील और अत्यंत अध्ययनशील व्यक्ति थे। उन्होंने साहित्य के साथ-साथ दर्शन, मनोविज्ञान और विज्ञान का भी गहरा अध्ययन किया था। ​ २. प्रमुख रचनाएँ (रचना संसार) ​शुक्ल जी ने इतिहास, आलोचना और निबंध के क्षेत्र में युग-प्रवर्तक कार्य किया: ​ सबसे प्रसिद्ध ग्रन्थ: 'हिंदी साहित्य का इतिहास' । यह ग्रन्थ आज भी हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन के लिए मील का पत्थर माना जाता है। ​ प्रमुख निबंध संग्रह: 'चिंतामणि' (दो भागों में)। इसमें संकलित निबंध, जैसे- 'उत्साह', 'श्रद्धा और भक्ति', 'करुणा', 'क्रोध', 'लोभ और प्रीति' आदि, हिंदी निबंध कला के सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है...

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