खान सर की सफलता की कहानी : ₹400 के कमरे से करोड़ों दिलों तक का सफर! जानिए Khan Sir Patna की अनसुनी कहानी ​ परिचय या जानकारी जब भी देश के सबसे लोकप्रिय, अनोखे और पसंदीदा शिक्षकों की बात होती है, तो 'खान सर' (Khan Sir) का नाम सबसे ऊपर आता है। अपनी ठेठ बिहारी बोली, गजब के सेंस ऑफ ह्यूमर और सबसे कठिन-से-कठिन टॉपिक को चुटकियों में समझा देने वाले अंदाज़ के कारण वे आज देश के कोने-कोने में मशहूर हैं। ​यूट्यूब पर करोड़ों सब्सक्राइबर्स और क्लासरूम में हजारों छात्रों के बीच छाए रहने वाले खान सर का असली नाम क्या है? उन्होंने अपना सफर कैसे शुरू किया और कैसे वे देश के सबसे सस्ते और बेहतरीन कोचिंग देने वाले शिक्षक बने? आइए जानते हैं खान सर की पूरी कहानी। ​1. शुरुआती जीवन और संघर्ष (Early Life & Background) ​खान सर का जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। ​पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता सेना में थे और भाई भी भारतीय सेना में कार्यरत हैं। देश सेवा का यह जज्बा खान सर में भी बचपन से था। ​सेना में जाने का सपना: खान सर भी एनडीए (NDA) के ज़रिए सेना में शामिल हो...

आदिकालीन साहित्य

 *रास (जैन) साहित्य की प्रमुख रचनाएं*-


👉 *रचना का नाम- रचनाकार का नाम*


👉भरतेश्वर बाहुबली रास- शालिभद्र सूरि (1184 ई.)

👉पांच पांडव चरित रास- शालिभद्र सूरि (14 वीं शताब्दी)

👉बुद्धि रास - शालिभद्र सूरि

👉चंदनबाला रास- कवि आसगु (1200 ई. जालौर)

👉जीव दया रास- कवि आसगु

👉स्थुलिभद्र रास- जिन धर्म सूरि (1209 ई.)

👉रेवंतगिरि रास- विजय सेन सूरि (1231 ई.)

👉नेमिनाथ रास- सुमित गुणि (1231 ई.)

👉गौतम स्वामी रास- उदयवंत/विजयभद्र

👉उपदेश रसायन रास- जिन दत्त सूरि

👉कच्छुलि रास- प्रज्ञा तिलक

जिन पद्म सूरि रास- सारमूर्ति

👉करकंड चरित रास- कनकामर मुनि

👉आबूरास-पल्हण

👉गय सुकुमाल रास- देल्हण/देवेन्द्र सूरि

👉समरा रास-अम्बदेव सूरि

👉अमरारास- अभय तिलकमणि

👉भरतेश्वर बाहुबलिघोर रास- वज्रसेन सूरि

👉मुंजरास- अज्ञात


👉नेमिनाथ चउपई- विनयचन्द्र सूरि(1200 ई.)

👉नेमिनाथ चरिउ - हरिभद्र सूरि (1159 ई.)

👉नेमिनाथ फागु - राजशेखर सूरि (1348 ई.)

👉कान्हड़-दे-प्रबंध- पद्मनाभ

👉हरिचंद पुराण -जाखू मणियार (1396 ई.)

👉पास चरिउ(पार्श्व पुराण)- पदम कीर्ति

👉सुंदसण चरिउ (सुदर्शन पुराण)- नयनंदी

👉प्रबंध चिंतामणि - जैनाचार्य मेरुतुंग

👉कुमारपाल प्रतिबोध- सोमप्रभ सूरि (1241ई.)

👉श्रावकाचार - देवसेन (933 ई.)

👉दब्ब-सहाव-पयास- देवसेन

👉लघुनयचक्र- देवसेन

👉दर्शनसार- देवसेन


✍💐 *रासो साहित्य की प्रमुख रचनाऍ*💐✍


पृथ्वीराज रासो- चंदबरदाई

👉बीसलदेव रासो -नरपति नाल्ह

👉परमाल रासो -जगनिक

👉हम्मीर रासो - शार्ड.ग्धर

👉खुमान रासो- दलपति विजय

👉विजयपाल रासो -नल्लसिंह भाट

👉बुद्धिरासो- जल्हण

👉मुंज रासो - अज्ञात

👉रासो नाम की अन्य रचनाएँ-

कलियुग रासो- रसिक गोविंद

👉कायम खाँ रासो- न्यामत खाँ जान कवि

👉राम रासो- समय सुंदर

👉राणा रासो- दयाराम (दयाल कवि)

👉रतनरासो- कुम्भकर्ण

👉कुमारपाल रासो- देवप्रभ


✍💐 *रासो साहित्य की प्रमुख विशेषताएं*-💐✍


👉 यह साहित्य मुख्यतः चारण कवियों द्वारा रचा गया

👉 इन रचनाओं में चारण कवियों द्वारा अपने आश्रयदाता के शौर्य एवं ऐश्वर्य का अतिश्योक्ति पूर्ण वर्णन किया गया है

👉 इन रचनाओं में ऐतिहासिकता के साथ-साथ कवियों द्वारा अपनी कल्पना का समावेश भी किया गया है

👉इन रचनाओं में युद्ध है प्रेम का वर्णन अधिक किया गया है

👉 इन रचनाओं में वीर व श्रंगार रस की प्रधानता है

👉इन रचनाओं में डिंगल और पिंगल शैली का प्रयोग हुआ है

👉 इनमें विविध प्रकार की भाषाएं एवं अनेक प्रकार के छंदों का प्रयोग किया गया है

👉इन रचनाओं में चारण कवियों की संकुचित मानसिकता का प्रयोग देखने को मिलता है

👉रासो साहित्य की अधिकांश रचनाएं संदिग्ध एवं अर्ध प्रमाणिक मानी जाती है|

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